Consider God a Member of Your Family

Bhakti Yoga

There are different paths of yoga like Raj yoga, Karma, Jnana, Hathyoga and so. They are difficult to achieve. You have to undergo different types of sadhana mentioned in our scriptures. Bhakti is inspired and sustained by God himself. It is achieved only by the grace of God. It is Prasad from almighty himself. Therefore there are no obstacles in the paths of Bhakti. When you surrender your mind to God it is bhakti. It needs complete devotion. You have to turn all your attachments, feelings and love towards God. Faith cannot be blind. Faith is an experience.Mantra sadhana, bhajan kirtan and chanting will take you to the higher and pure level of consciousness and help you to dive within.

भजन कीर्तन एवं प्रार्थना के वगैर योग अपूर्ण है । संगीत, ब्रह्मानंद तक साधक को ले जाता है । स्वामींजी का हर एक कार्यक्रम कीर्तन, प्रार्थना से ही षुरु होता है । उनकी मधूर आवाज में कीर्तन सुनने को षिविरार्थी आतूर रहते है । देवास म. प्र. के श्रीमान असीम पंडीत परिवार ने स्वामींजी की एक ध्वनी मुद्रिका (Audio CD) बनवाई है जो हर षिवीर में साधकों को उपलब्ध करायी जाती है ।

cd-cover

Bhajan Kirtan

swami1शरीर के लिए प्राणतत्व जितना आवश्यक है, उतना ही आत्मा के लिए प्रार्थना भी आवश्यक है । प्रार्थना जीवात्मा का परमात्मा के साथ ऐक्य कराती है । प्रार्थना व्यक्ति के अहं को विगलित कर आत्मा को प्रकाशित करती है ।
- स्वामी शिवानन्द

 

swami2नाम संकीर्तन अपने आपको समझने का सबसे आसान एवं सुलभ तरीका है । संगीत सीधे अनुभव के स्तर पर, अवचेतन स्तर पर पहुॅुंचता है । रामचरित मानस में लिखा है, ‘भगवान् का साक्षात्कार करना है तो कीर्तन करो ।’ यह कीर्तन की महिमा है । भगवान् का भजन करने से अच्छा ज्ञान भी प्राप्त होता है, मन भी बहुत उॅंचा उठता है । भगवान् का भजन प्रेरणा देता है, इसमें आनन्द के अतिरिक्त एक अन्य अवस्था आती है, जिसको कहते हैं तन्मयता । मन उसमें डूब जाता है, और आत्मा और परमात्मा में सम्बन्ध होने लगता है ।
- स्वामी सत्यानन्द

 

swami3कीर्तन या भजन अपने आप में एक साधना है, जिसके द्वारा व्यक्ति मन की गहराई में नहीं, बल्कि आनन्द के समुद्र में कूद पड़ता है । कीर्तन वह योग है जो व्यक्ति के बाहय अनुभवों को आत्मानुभवों के साथ जोड़ता है । यही एक ऐसा योग है, जिसमें बिना किसी प्रयास के व्यक्ति अपनी सीमाओं को तोड़ने में सक्षम हो जाता है । इस योग में एक ही चीज की जरुरत है - लीन हो जाना, तन्मय हो जाना । अपने आपको वर्तमान के अनुभव में खो देना ।
स्वामी निरंजनानन्द

 

swami4नाम-संकीर्तन भक्ति का सर्वश्रेष्ठ उपाय है । श्रीमगवत् मंनारद जी कहते हैं -
एतद्ध्यातुरचित्तांना मात्रास्पर्षेच्छया मुहु:। भवसिन्धुप्लवो दृश्टो हरिचर्यानुवर्णनम् ।।

‘‘जिन लोगों का चित्त निरंतर विष्य भोगों की कामना से आतुर रहता है, उनके लिए भगवान् की लीलाओं का कीर्तन संसार - सागर से पार ले जाने वाला जहाज है, यह मेराअनुभव है ।’’

- स्वामी सत्यसंगानन्द

योग पब्लिकेषन्स ट्रस्ट मंुगेर द्वारा प्रकाषीत ‘सिध्द प्रार्थना’ में स्वामी सत्यानंद सरस्वती के प्रिय भजनो का संकलन है । उनमे से कुछ चूनिंदा भजन, कीर्तन,प्रार्थना व स्तोत्र एवं अन्य प्रार्थना भी आपकी सेवामें सादर है ।

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